प्रकाशन तिथि: 5 जुलाई 2026 | श्रेणी: मानसून | आपदा प्रबंधन | सार्वजनिक सुरक्षा
प्रस्तावना: भारत की सबसे कम चर्चित लेकिन सबसे घातक प्राकृतिक आपदा
जब भी प्राकृतिक आपदाओं की बात होती है, तो बाढ़, चक्रवात और भूकंप जैसी घटनाएं ही चर्चा में रहती हैं। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि भारत में बिजली गिरना (Lightning Strike) प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है। हर मानसून सीजन में सैकड़ों किसान, मजदूर और खुले मैदानों में काम करने वाले लोग बिजली गिरने से अपनी जान गंवा देते हैं। यह खतरा खामोश है, लेकिन इसका असर किसी भी बड़ी आपदा से कम नहीं है।
भाग 1: आंकड़ों में भारत में बिजली गिरने से मौतें
सरकारी और शोध संस्थानों के आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को स्पष्ट करते हैं। वर्ष 1975 से 2024 के बीच भारत में बिजली गिरने से एक लाख से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें से आधे से ज्यादा मौतें केवल पिछले दो दशकों (2005-2024) में हुई हैं। वर्ष 2005 के बाद से किसी भी वर्ष में यह आंकड़ा 2,000 से नीचे नहीं गया, और कई वर्षों में यह 2,800 के पार भी पहुंचा है। कर्नाटक जैसे राज्यों में तो बिजली गिरना अब प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली कुल मौतों में आधे से अधिक हिस्सेदारी रखता है। ओडिशा, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य भी इस खतरे से बुरी तरह प्रभावित रहते हैं — हाल ही में उत्तर प्रदेश में एक ही तूफान के दौरान सौ से अधिक लोगों की मौत बिजली गिरने से हुई थी।
भाग 2: बिजली गिरने की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं?
- जलवायु परिवर्तन: गर्म होते वातावरण के कारण वायुमंडल में नमी और ऊर्जा दोनों बढ़ रही हैं, जिससे तूफान अधिक तीव्र होते हैं और बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ती हैं।
- खुले खेतों में काम: भारत में बड़ी संख्या में किसान और खेतिहर मजदूर मानसून के दौरान खुले खेतों में काम करते हैं, जिससे वे सीधे खतरे की चपेट में आते हैं।
- पेड़ के नीचे शरण लेना: तूफान के दौरान लोग अक्सर पेड़ के नीचे शरण लेते हैं, जबकि ऊंचे पेड़ बिजली को आकर्षित करने का काम करते हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
- पूर्व चेतावनी प्रणाली की सीमित पहुंच: ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में मोबाइल अलर्ट या सायरन जैसी चेतावनी प्रणाली अभी भी हर व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाती।
भाग 3: सबसे ज्यादा खतरे में कौन?
शोध बताते हैं कि बिजली गिरने से होने वाली मौतों में सबसे अधिक शिकार गरीब और खुले में काम करने वाले वर्ग के लोग होते हैं। खेतों में काम कर रहे किसान, मछुआरे, निर्माण मजदूर और चरवाहे इस खतरे के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं। चिकित्सा शोध यह भी बताते हैं कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली कुल मौतों में एक-तिहाई से अधिक हिस्सा अकेले बिजली गिरने का है, जो इसे एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा मुद्दा बनाता है।
भाग 4: सरकार और वैज्ञानिक संस्थानों के प्रयास
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने आम जनता के लिए “दामिनी” (Damini) मोबाइल ऐप विकसित किया है, जो 20-40 किलोमीटर के दायरे में बिजली गिरने की संभावना की पूर्व चेतावनी देता है। इसके अलावा कई राज्य सरकारें बिजली गिरने से हुई मौतों पर आर्थिक मुआवजा भी देती हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने स्कूलों, पंचायतों और सामुदायिक केंद्रों में बिजली सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम चलाने की सिफारिश की है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग सही समय पर सुरक्षित स्थान पर पहुंच सकें।
भाग 5: बिजली गिरने से बचाव के उपाय
- 30-30 का नियम अपनाएं: यदि बिजली चमकने के 30 सेकंड के अंदर गड़गड़ाहट सुनाई दे, तो तुरंत सुरक्षित इमारत में चले जाएं और आखिरी गड़गड़ाहट के 30 मिनट बाद ही बाहर निकलें।
- पेड़ों से दूर रहें: तूफान के दौरान कभी भी अकेले पेड़ के नीचे शरण न लें।
- खुले मैदान से बचें: खेत, मैदान या पहाड़ी की चोटी पर तूफान के दौरान रुकना खतरनाक हो सकता है।
- दामिनी ऐप का उपयोग करें: IMD का यह ऐप बिजली गिरने की पूर्व चेतावनी देता है, इसे मोबाइल में जरूर रखें।
- धातु की वस्तुओं से दूरी बनाए रखें: तूफान के दौरान छाता, कुदाल या अन्य धातु उपकरण शरीर से दूर रखें।
- पक्के मकान में शरण लें: तूफान के दौरान खिड़कियों और बिजली के उपकरणों से दूर, पक्के मकान के अंदर सुरक्षित रहें।
निष्कर्ष: जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
बिजली गिरना भले ही बाढ़ या चक्रवात जितनी सुर्खियां न बटोरे, लेकिन आंकड़े साफ बताते हैं कि यह भारत में सबसे अधिक जानलेवा प्राकृतिक खतरों में से एक है। जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले वर्षों में इसकी तीव्रता और बढ़ने की आशंका है। सही जानकारी, समय पर चेतावनी और सही व्यवहार अपनाकर इन मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है। जरूरत है कि यह जानकारी हर गांव, हर खेत और हर स्कूल तक पहुंचे।
प्रमुख स्रोत एवं संदर्भ (References)
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) — दामिनी लाइटनिंग अलर्ट ऐप
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) — बिजली सुरक्षा दिशा-निर्देश
- The Hindu — लाइटनिंग मृत्यु आंकड़े विश्लेषण, 2026
- Mongabay India — बिजली आपदा रिपोर्टिंग, 2026
- The BMJ — Lightning and Public Health in India, शोध पत्र
- The Times of India — राज्यवार प्राकृतिक आपदा मृत्यु आंकड़े, 2026
